संविधान के अनुच्छेद
165 में राज्य के महाधिवक्ता की व्यवस्था की गई है । यह राज्य का सर्वोच्च कानून अधिकारी होता है , इस तरह यह महान्यायवादी का अनुपूरक होता है । महाधिवक्ता की नियुक्ति राज्यपाल द्वारा की जाती है, उसमे उच्च न्यायालय का न्यायधीश बनने की योग्यता होनी चाहिए, महाधिवक्ता का न कार्यकाल निश्चित है और नहीं हटाने की व्यवस्था की गई है, वह अपने पद पर राज्यपाल के प्रसादपर्यंत बना रहता है । तथा राज्यपाल द्वारा किसी भी समय अपने पद से हटाया जा सकता है । इसके वेतन भत्ते भी निश्चित नहीं है, इसका निर्धारण भी राज्यपाल द्वारा ही किया जाता है।
* महाधिवक्ता राज्य सरकार को विधि संबंधी विषयो पर सलाह देता है ।
* विधिक स्वरुप के ऐसे अन्य कार्य करता है, जो राज्यपाल द्वारा सोंपे गए हो ।
* उसे राज्य के किसी भी न्यायालय में सुनवाई का अधिकार होता है ।
* इसके अतिरिक्त विधानमंडल के दोनों सदनो में भाग लेने का व बोलने का अधिकार भी है । तथा वे सभी विशेषाधिकार एवं भत्ते मिलते हैं जो विधानमंडल के किसी भी सदस्य को मिलते है ।
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