पूजा स्थल कानून ( worship act 1991) क्या हे ?

 * कांग्रेस की नरसिम्हा सरकार 1991 में  यह कानून लेकर आई थी |  

*मंदिर आन्दोलन के दोर में बढते, मंदिर - मस्जिद  विवादों को रोकने के लिए यह कानून आया था |

विरोधियो  का तर्क :- 1192 से 1947 तक गैर - कानूनी रूप से स्थापित पुजा स्थलों को यह कानून  कानूनी मान्यता देता हे | 


place of worship act की  धारा ( 3 )  के अनुसार  किसी भी धार्मिक स्थल को , पूरी तरह या आंशिक रूप से भी किसी दुसरे धर्म में बदलने की अनुमति नहीं हे |   इसके साथ ही यह भी सुनिश्चित  करती हे  कि एक धर्म के पुजा स्थल को दुसरे धर्म के रूप में ना बदला जाये , या एक ही धर्म के अलग खंड में भी ना बदला जाये |

" इसकी धारा 4 (1) कहती हे कि 15 अगस्त 1947 को एक पुजा स्थल जैसा था , उसे  वैसा ही बरकरार रखा जायेगा | धारा 4 (2) कहती हे कि उन सब  कानूनी कार्यवाही को रोका जाये , जो place of worship act के लागु होने की तारीख पर पेंडिंग  थे |

पेनल्टी:- यह कानून सभी के लिए सामान रूप से कार्य करता हे , इस act का उलंघन करने वाले को 3 साल की सजा और जुर्माने का प्रावधान हे | 

पूजा स्थल कानून यह कहता हे कि अगर धार्मिकस्थलों में कोई एतिहासिक प्रमाण या साक्ष्य मिलते हे तब भी कुछ नहीं होगा , प्रमाणों के बाद भी इसके स्वरुप में कोई बदलाव नहीं हो सकता ,भले ही यह साबित हो जाए कि इसे तोड़कर बनाया गया हे |

इस अधिनियम  के आने के पहले इस तरह धार्मिक स्थल संबंधी विवाद  किसी भी न्यायालय या किसी अन्य प्राधिकरण के समक्ष पहले ही निपटा लिया गया हे तो वह निर्णय भी अंतिम होगा , उनके ऐसे निर्णय को भी इस अधिनियम के आने के बाद चुनोती नहीं दी जाएगी |

किन्तु यह अधिनियम रामजन्मभूमि-बाबरी मस्जिद पर लागु नहीं होगा ,जो की उत्तर प्रदेश अयोध्या में स्थित हे , उसके किसी पुजा स्थल या स्थान स्वरुप में केसा भी परिवर्तन किया जा सकेगा , जिसके संबंध में कोई न्यायिक कार्यवाही ग्रहण नहीं की जावेगी |

क्या ये कानून बदला जा सकता हे  ? हाँ यदि केंद्र सरकार चाहे तो इस कानून में संशोधन कर सकती हे | लेकिन इसके लिए उसे संसद में एक प्रस्ताव लाकर पास करना होगा , और कानून की शक्ल  देनी होगी |

      


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