जमानत - जब किसी व्यक्ति को, किसी अपराध के कारण पुलिस द्वारा या न्यायालय द्वारा कारागार में बंद किया जाता है ओर ऐसे व्यक्ति को कारागार से छुड़ाने के लिए, न्यायालय में जो संपत्ति जमा की जाती है , या देने की शपथ ली जाती है, उसे जमानत कहते हैं ।
जमानत के प्रकार -
1 ) रेगुलर ज़मानत
2 ) अंतरिम जमानत
3 ) अग्रिम जमानत
1 ) रेगुलर जमानत - CRPC की धारा 439 में रेगुलर बैल या नार्मल बैल की व्यवस्था की गई है, जब आरोपी व्यक्ति का मामला कोर्ट में पेंडिंग होता है तब वह व्यक्ति उस दौरान जमानत की अर्जी लगा सकता है । तब ट्रायल कोर्ट या हाई कोर्ट जैसी भी स्थिति हो, अर्जी पर बैल देने से पहले मामले की गंभीरता ओर आरोपी व्यक्ति का पूर्वाचरण आदि सब देखने के बाद ही, बैल एप्लिकेशन स्वीकार या अस्वीकार करती है ।
2 ) अंतरिम बैल - जब आरोपित व्यक्ति बैल के लिये आवेदन करता है तो कोर्ट द्वारा जांच की जाती है, तथा जांच के दौरान समय भी लगता है तो ऐसी स्थिति में जब तक बैल आवेदन पर कोर्ट अंतिम निर्णय नहीं देती है, उससे पहले ही अंतरिम जमानत जिसे राहत बैल भी कह सकते हैं, प्रदान की जाती है ।
3 ) अग्रिम जमानत - जैसा की नाम से ही स्पष्ट है कि गिरफ्तारी से पहले ही होने वाली जमानत धारा 438, CRPC में प्रावधान है कि, जब किसी व्यक्ति को यह युक्तियुक्त आशंका हो कि कोई उसे अजमानतीय अपराध में फ़साने वाला है या उसकी गिरफ्तारी हो सकती है तो वह हाई कोर्ट या शेषन कोर्ट में अग्रिम जमानत के लिए आवेदन कर सकता है, ओर यदि कोर्ट द्वारा उसकी अग्रिम जमानत स्वीकार कर ली जाती है, तो उसे संबंधित मामले में गिरफ्तार नहीं किया जा सकता है ।
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