दबाव समूह विधिक ओर तर्क संगत तरीको द्वारा सरकार की नीति निर्माण ओर नीति निर्धारण को प्रभावित करते है । जैसे कि - सभाए करना, पत्राचार, जन प्रचार अनुरोध करना, जन वाद-विवाद अपने विधायकों के संबंधो को बनाए रखना आदि । इस तकनीक को " लॉबिंग " कहते है । वे जनता की राय को प्रभावित करने का प्रयास करते हैं । चूँकि सरकार जनतांत्रिक होती है और जनता की राय से पूर्ण प्रभावित रहती है । इसे प्रचार व्यवस्था भी कहते है ।
भारत में बड़ी संख्या में दबाव समूह विधमान है । लेकिन ये उस तरह से विकसित नहीं हुए हैं , जिस तरह से अमेरिका व पश्चिम देशों में है ।
भारत में निम्न प्रकार के दबाव समूह है -
1) व्यवसायिक समूह 2) व्यपार संघ 3) खेतिहर समूह 4 ) जातीय समूह 5 ) धार्मिक संगठन 6 ) छात्र संगठन 7 ) आदिवासी संघटन 8 ) भाषागत समूह 9 ) पेशेवर समितिया 10 ) विचार धारा आधारित समूह ।
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