दबाव समूह क्या है, इसके कार्य, व महत्व क्या है ?

दबाव समूह, उन लोगों का समूह होता है जो सक्रिय रूप से संगठित है । जो अपने हितों को बढ़ावा देते हैं उनकी प्रतिरक्षा करते हैं, या यह कह सकते हैं कि सरकार पर दबाव बनाकर लोकनीति को बदलने की कोशिश करते हैं । ये सरकार ओर उनके सदस्यों के बीच संपर्क का काम करते हैं ।इन दबाव समूहो को हितार्थ समूह भी कहा जाता है । ये राजनीतिक दलों से भिन्न होते हैं । ये न तो चुनाव में भाग लेते हैं, ओऱ न ही राजनीतिक शक्तियों को हतियाने की कोशिश करते हैं । ये कुछ ख़ास कार्यक्रमो ओर मुद्दो से सम्बंधित होते है । ओर इनकी इच्छा, सरकार में प्रभाव बनाकर अपने सदस्यों की रक्षा ओऱ हितो को बढ़ाना होता है ।


दबाव समूह विधिक ओर तर्क संगत तरीको द्वारा सरकार की नीति निर्माण ओर नीति निर्धारण को प्रभावित करते है । जैसे कि - सभाए करना, पत्राचार, जन प्रचार अनुरोध करना, जन वाद-विवाद अपने विधायकों के संबंधो को बनाए रखना आदि । इस तकनीक को " लॉबिंग " कहते है । वे जनता की राय को प्रभावित करने का प्रयास करते हैं । चूँकि सरकार जनतांत्रिक होती है और जनता की राय से पूर्ण प्रभावित रहती है । इसे प्रचार व्यवस्था भी कहते है ।
भारत में बड़ी संख्या में दबाव समूह विधमान है । लेकिन ये उस तरह से विकसित नहीं हुए हैं , जिस तरह से अमेरिका व पश्चिम देशों में है ।
भारत में निम्न प्रकार के दबाव समूह है -
1) व्यवसायिक समूह 2) व्यपार संघ 3) खेतिहर समूह 4 ) जातीय समूह 5 ) धार्मिक संगठन 6 ) छात्र संगठन 7 ) आदिवासी संघटन 8 ) भाषागत समूह 9 ) पेशेवर समितिया 10 ) विचार धारा आधारित समूह ।

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