संविधान के अनुसार भारत की संसद के तीन अंग हैं 1 ) राष्ट्रपति 2) लोकसभा 3) राज्यसभा। लोकसभा- निम्न सदन , ओर राज्यसभा - उच्च सदन कहलाता है
हालांकि, राष्ट्रपति किसी भी सदन का सदस्य नहीं होता है ओर नाही वह किसी सदन में बैठता है, लेकिन राष्ट्रपति संसद का अभिन्न अंग है।संसद के दोनों सदनों द्वारा पारित कोई भी विधेयक (bill) राष्ट्रपति द्वारा स्वीकृति मिलने के बाद ही "विधि " बनता है।भारतीय संसद में राष्ट्रपति का स्थान सर्वोच्च है, दोनों सदनों को बुलाना, लोकसभा का विघटन, अध्यादेश जारी करना, ओर कई विशेषाधिकार राष्ट्रपति को प्राप्त है। अतः हमारी भारतीय संसदीय पद्धति में तीनो अंग राष्ट्रपति + लोकसभा + राज्यसभा परस्पर मिल कर ही राज्य व्यवस्था को क्रियान्वित करते है व तीनों एक दूसरे पर निर्भर है। ये तीनों अंग मिलकर ही ' संसद ' का निर्माण करते हैं।इसलिए कहा जाता हैं कि हमारे यहां द्विसदनात्मक संसदीय प्रणाली है।या संसदीय व्यवस्था है।
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