भारत में जनहित याचिका या P I L की उत्पत्ति न्यायिक सक्रियता का ही एक रूप है। न्यायमूर्ती पी.एन. भगवती ने इस अवधारणा को सार्थक रूप प्रदान किया
इसके अंतर्गत कोई भी जनभावना वाला व्यक्ति या सामाजिक संगठन किसी भी व्यक्ति या व्यक्तियों के समूह को उनके अधिकारों के लिये न्यायालय जा सकता है। प्रायः ऐसे व्यक्ति जो अज्ञानता, निर्धनता, सामाजिक-आर्थिक रूप से अक्षम होने के कारण न्यायालय में उपचार हेतु नहीं जा सकते तो कोई भी व्यक्ति इनकी मदद हेतु उनके अधिकारों के लिए उनकी ओर से न्यायालय में जा सकता हैं।
Must read - पैसा एक्ट क्या है ?
Must read -संसद किसे कहते हैं ?
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें