संविधान द्वारा बिना किसी भेदभाव के हर व्यक्ति के लिये समानता, सम्मान, व अधिकार के संबंध मे ग्यारंटी दी गई है ।मूल अधिकार कठोर नियमो के खिलाफ नागरिको की आजादी की सुरक्षा करते हैं । एवं तानाशाही को मर्यादित करते है ।
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मूल अधिकारों को यह नाम इसलिये दिया गया है क्योंकि इन्हें संविधान द्वारा सुरक्षा एवं गारंटी प्रदान की गई है जो राष्ट्रीय कानून का मूल सिद्धांत है । ओर मूल इसलिये भी है कि व्यक्ति के चहुमुखी विकास के लिये आवश्यक भी है ।
संविधान में 06 प्रकार के मूल अधिकारों का उल्लेख है, इनमें से कुछ अधिकार केवल भारतीय नागरिकों के लिए ही है, जैसे - आर्टीकल - 15, 16, 19, 29, 30 तथा बाकि नागरिकों / व्यक्तियों दोनों के लिये है ।
ये असीमित नहीं है, इन पर राज्य द्वारा प्रतिबंध भी लगाए जा सकते है लेकिन सामान्य परिस्थितियों में नहीं, कुछ अपवादिक परिस्थितियों में ही ।
मूल अधिकारों का उल्लंघन होने पर पीड़ित व्यक्ति सीधे उच्चतम न्यायालय या उच्च न्यायालय जा सकता है ।
ये स्थाई नही है, इनमें संसद द्वारा कटौती या कमी की जा सकती है लेकिन, संशोधन अधिनियम के द्वारा ही न कि साधारण विधेयक द्वारा ।
वास्तव में मूल अधिकारों के संबंध में जितना विस्तृत विवरण हमारे संविधान में है उतना विश्व के किसी भी देश में नहीं ।
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