राष्ट्रपति की वीटो पावर

संसद द्वारा पारित कोई भी विधेयक तभी अधिनियम बनता है, जब राष्ट्रपति उसे अपनी सहमति देता है ।राष्ट्रपति के पास ऐसे विधेयक पर सहमति से पहले तीन विकल्प होते हैं ।

1 ) विधेयक पर अपनी स्वीकृति दे दे ।
2) विधेयक पर अपनी सहमति सुरक्षित रख ले
3) संसद में पुनर्विचार के लिए लोटा दे ।
अब पॉकेट वीटो या वीटो के मामले में राष्ट्रपति विधेयक पर न तो कोई सहमति देता है , न अस्वीकृत करता है, ओर न ही लौटाता है, किंतु एक अनिश्चित काल के लिये विधेयक को लंबित कर देता है । राष्ट्रपति को, किसी विधेयक को रोककर रखने की शक्ति ही " वीटो पावर " कहलाता है। राष्ट्रपति इस वीटो पावर का प्रयोग इस आधार पर करता है कि किसी विधेयक पर निर्णय देने के लिये कोई समय सीमा तय नहीं है । संविधान द्वारा प्रदत्त यह विषेशाधिकार राष्ट्रपति की शक्ति अद्वितीय है ।
किन्तु एक बात ओर है कि वीटो पावर का प्रयोग धन विधेयक पर लागू नहीं होता है ।

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