आपातकालीन स्थिति में केंद्र सरकार सर्वशक्तिमान हो जाती हैं ।
संविधान में 3 प्रकार के आपातकाल को निर्दिष्ट किया है-
1 ) आर्टिकल 352 - (राष्ट्रीय आपात ) - यदि भारत को या उसके किसी भाग को, युद्ध, बाहय आक्रमण या सशत्र विद्रोह के कारण खतरा उत्पन्न हो गया हो तो राष्ट्रपति द्वारा " राष्ट्रीय आपात " की घोषणा की जाती है।
2 ) आर्टिकल 356 - (राष्ट्रपति शासन ) - जब किसी राज्य में राजकीय व्यवस्था या संविधानिक क्रियाकलाप अव्यवस्थित हो जाता है या जिसको की राज्य सरकार पूर्ण रूप से संभालने में विफल हो जाती है, तो ऐसी विफलता के परिणामस्वरूप राज्य सरकार राष्ट्रपति से अनुरोध करती है कि राज्य की शासन व्यवस्था को आप संचालित कीजिए । ऐसी असामान्य परिस्थिति में राज्य की बागडोर राष्ट्रपति (केंद्र ) के हाथो मै आ जाती है जिसे ही साधारण शब्दों में " राष्ट्रपति शासन " के नाम से जाना जाता है ।
3 ) आर्टिकल 360 ( वित्तीय आपात ) - जब भारत की वित्तीय स्थायित्व या साख खतरे में पड़ जाती है, या राष्ट्रपति को लगता है कि ऐसी स्थिति उत्पन्न हो गई है कि, भारत के या उसके किसी क्षेत्र की वित्तीय स्थिति खतरे में है , तो वह वित्तीय आपात की घोषणा कर सकते है । राष्ट्रपति की यह शक्ति अंतिम ओर निर्णायक है तथा किसी न्यायालय में किसी भी आधार पर प्रश्न योग्य नहीं है । इससे राष्ट्रपति किसी भी श्रेणी के व्यक्तियों के वेतन-भत्तों में कटौती के निर्देश जारी कर सकता है । वैसे भारत में आज तक कभी भी " वित्तीय आपात " की स्थिति नही बनी है ।
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