सूचना का अधिकार ( Right to information )

सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के अंतर्गत भारत के प्रत्येक नागरिक को सूचना लेने या जानने का अधिकार देता है, इस अधिकार के द्वारा किसी भी विभाग से कोई सूचना लेने का अधिकार प्राप्त है । सही अर्थों में से एक आम नागरिक ही देश को चलाता है, जब एक आम नागरिक कोई भी वस्तु खरीदता है, तो उसके साथ साथ कर का भी भुगतान करता है, कर के माध्यम से ही सरकार चलती है तो उसे यह जानने का पूरा अधिकार है कि सरकार किस विभाग में कितना पैसा ख़र्च करती है, किस अधिकारी या राजनेता की जेब में कितना पैसा जाता है इन सब प्रश्नों के जवाब सूचना के अधिकार के माध्यम से मांगे जाते हैं । इसके अंतर्गत आप सरकारी निर्णय की प्रति ले सकते हैं, सरकारी दस्तावेजों का निरीक्षण कर सकते हैं , सरकारी कार्यों का निरीक्षण कर सकते हैं ।
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( RIT ) के तहत प्रत्येक सरकारी विभाग में जन / लोक सूचना अधिकार होता है जिसके पास आवेदन जमा करना होता है, जिसके साथ 10 रुपये का आवेदन शुल्क देना पड़ता है, हालांकि विभिन्न राज्यों में अलग अलग शुल्क निर्धारित है । आवेदन के 30 दिनों के अंदर सूचना पाने का प्रावधान है , यदि सूचना अधिकारी सूचना देने मे देरी करता है तो वह अपने देरी के कारण को अभिलिखित करेंगा ओर यदि बिना किसी कारण के सूचना नहीं देता है , या देने से इंकार करता है तो सूचना मांगने वाला नागरिक धारा 19 के तहत अपील दायर कर सकता है । ओऱ यदि पहली अपील से भी संतुष्ट नहीं है, तब द्वितीय अपील भी कर सकता है ।
इस प्रकार RIT के तहत आम नागरिक ओऱ सरकारी विभागों के बीच पारदर्शिता बढ़ गई है ।

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