m.p. स्वतंत्रता अध्यादेश 2020 ( लव जिहाद )

MP स्वतंत्रता अध्यादेश 2020 , 9 january 2021 को प्रकाशित किया गया । इस अध्यादेश को लागू करने का मूल उद्देश्य कपटपूर्ण तरीके से एक धर्म से दूसरे धर्म में सपरिवर्तन को रोकना है ।


इस अध्यादेश में, अपराध होने पर न्यूनतम 1 वर्ष व 25000 रुपये की सज़ा का प्रावधान है । एवं अधिकतम 5 वर्ष तक की सजा भी हो सकती है ।
लव जिहाद, इसीका एक उदाहरण है, इस पर सबसे पहले कानून up state द्वारा लागू किया गया ।
इस अध्यादेश में किये गए अपराध को अजमानतीय ओर सत्र न्यायालय द्वारा विचारणीय योग्य श्रेणी में रखा गया है ।
अगर कोई व्यक्ति बिना दबाव के स्वेच्छा से धर्म परिवर्तन करना चाहे तो, उसे 60 दिन पूर्व जिला मजिस्ट्रेट को अपने कथन के साथ आवेदन प्रस्तुत करना होगा ।
इस अध्यादेश के परिणाम स्वरूप काफि हद तक धर्म परिवर्तन से सम्बंधित अपराधों पर प्रतिबंध लगाया जा सका है । हमारे संविधान में धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार मूल अधिकारों में से एक है ओर मूल अधिकारों का उल्लंघन वास्तव मे किसी भी व्यक्ति का व्यक्तिगत अधिकार है, जिसे की कोई भी अन्य व्यक्ति, कम नहीं कर सकता, ओर नही छीन सकता है, ऐसा करना अपराध है, ऐसे अपराध के लिए दंड की व्यवस्था करना ही इस अधिनियम का सर्वोच्च उद्देश्य है ।

MSME ( mp ) विकास नीति 2021 क्या है

इस नीति के तहत छोटे-छोटे उधोगों को रियायतें ओर सुविधाए देकर mp को आत्मनिर्भर बनाना तथा स्थानीय युवाओं के कौशल उन्नयन के साथ उन्हें प्रदेश में ही रोजगार उपलब्ध करवाना है ।


इसके अनुसार 25 करोड़ स्थाई पूंजी, निवेश वाली नई यूनिट के लिए 5 वर्ष के लिये ब्याज  अनुदान 2 % की दर से 5 करोड़ रुपये की सीमा तक दिये जाने का प्रावधान है ।

पैसा एक्ट क्या है ?

पैसा कानून के तहत आदिवासी क्षेत्रों में ग्राम सभाओं को सभी गतिविधियों का केंद्र बनाने की कोशिश की गई है ।आदिवासी बाहुल्य गांवों में कौन से विकास कार्य कराए जाने है, ओर प्राथमिकता क्या रहेंगी यह ग्राम सभा ही तय करेंगी । जैसे - 
* खनिजों का लायसेंस । वहां देने के लिए ग्राम सभा की सिफारिश लेना अनिवार्य है ।
* ग्राम बाजारो का प्रबंधन करने की शक्ति ।
* सामुदायिक वन प्रबंधन के तहत वनोपज सम्बंधी निर्णय लेना
* तेंदुपत्ता संग्रहण ओर विक्रय का काम ग्राम सभा करेंगी।
* शराब की दुकान खोलने के लिए ग्राम सभा की अनुमति लेनी होगी अनुमति के बिना नहीं खोल सकते ।तथा खदान के संचालन का निर्णय लेना ।
* आदिवासियों की भूमि पर किसी गैर आदिवासी ने कब्जा कर लिया है तो उसे वापस दिलाना ओऱ उसके लिए राजस्व विभाग भी कार्यवाही करता है ।
यह एक केंद्रीय कानून है, जो संविधान के 9 वें भाग में दिये गए आदिवासी उपबंधो में कुछ संशोधन के साथ विस्तारित करता है ओऱ जनजातीय जनसंख्या को स्वशासन प्रदान करता है । इस कारण इस अधिनियम का पूरा नाम पंचायत ( अनुसूचित क्षेत्रों के लिए विस्तार ) अर्थात पैसा अधिनियम रखा गया है ।
यह अधिनियम आदिवासी क्षेत्रों को विशेष दर्जा प्रदान करता है ।

आर्टीकल 370 क्या है

हमारे भारतीय संविधान में अनुच्छेद 370 जो कि j&k को विशेष प्रावधान देने की बात करता है अर्थात संसद द्वारा जो भी कानून बनाए जाते है , पूरे देश में लागू होता है, लेकिन j&k पर लागू नहीं होता ।

लेकिन अब जब आर्टीकल 370 के तहत जम्मू कश्मीर को जो विशेष दर्जा दिया गया था, उसे  j/k पुनर्गठन बिल 2019 के तहत हटा दिया गया है ।
आज की स्थिति के अनुसार j&k भारत का हिस्सा है और वहां का अपना flag + constitution पूरी तरह से खत्म हो चूका है, अब Indian constitution ही वहां भी लागू होंगा तथा संसद द्वारा बनाए गए सारे नियम / कानून वहां भी लागू होंगे ।
पहले केंद्र सरकार j&k के सिर्फ कुछ क्षेत्रों के लिए ही कानून बना सकती थीं - जैसे
1 ) रक्षा 
2) विदेश
3) संचार
इन तीनों क्षेत्रों के अलावा कोई कानून /नियम बनाया जाता था तो वहाँ के राज्य सरकार से परमिशन लेनी पड़ती थी । लेकिन अब ऐसा नहीं है ।

j&k की विधानसभा का कार्यकाल 6 वर्ष का होता था, अब हमारे संविधान के हिसाब से 5 वर्ष का ही हो गया है
इस प्रकार,  j&k ओर लद्दाख़ दो केंद्र शाषित प्रदेशों के रूप में विभाजित हो गया है । 370 हटाने के बाद 890 केंद्रीय कानून वहां लागू हो गए हैं । 70 साल के बाद अब जम्मू कश्मीर के लोगों को जो नकारा गया , वह उन्हें दिया जाएगा । sc /st के उपबंध भी अब जम्मू कश्मीर के लोगों के लिए उपलब्ध है । जम्मू कश्मीर के लोगों के पास दोहरी नागरिकता होती थी, दूसरे राज्यों के लोग वहां जमीन नहीं खरीद सकते थे , लेकिन अब ऐसा नहीं है ।

आर्टिकल 35 A क्या है , यह विवादित क्यो है ,

आर्टीकल 35 A जम्मू कश्मीर को राज्य के रूप में विशेष अधिकार देता है, इसके तहत दिये गए अधिकार
स्थाई निवासियों से जुड़े हुए है । अर्थात जम्मू-कश्मीर राज्य सरकार को यह अधिकार देता है कि वह आजादी के वक्त दूसरी जगह से आए शरणार्थियों ओर अन्य भारतीय नागरिकों को जम्मू-कश्मीर में किस तरह से सहूलियत दे अथवा नहीं ।
स्थाई नागरिको (J&K) से संबंधित कानून
1 ) इसके तहत, संविधान में कुछ भी हो, फिर भी कोई वर्तमान कानून ( J&K ) में क्रियान्वित नहीं होगा ।
2 ) ऐसे स्थाई नागरिकों को विशेषाधिकार देना , तथा अन्य व्यक्तियों पर इन क्षेत्रों में प्रतिबंध लगाना ।
* राज्य सरकार में नोकरी
* राज्य की अचल संपत्ति का अधिग्रहण
* राज्य में रहना / बसना
* राज्य द्वारा दी जाने वाली छात्रवृत्ति या कोई अन्य सहायता

यह सब भारतीय नागरिकों को इसलिये नही दी जाती थी क्योंकि यह जम्मू-कश्मीर के स्थाई नागरिकों के लिए ही विशेषाधिकार थे । लेकिन अब 5 अगस्त 2019 को आर्टिकल  35 A  को निरस्त कर दिया गया ।इसके तहत सारे विशेषाधिकार भी निरस्त कर कर दिये गए  है । यह आर्टिकल, आर्टीकल 370 का अपवाद माना जाता था। अब इस संशोधन के बाद भारतीय नागरिकों को जम्मू-कश्मीर का नागरिक होने जैसे सारे अधिकार व सहायता प्राप्त हो गई है ।

केंद्रीय सतर्कता आयोग के कार्य

यह आयोग केंद्र सरकार में भ्रष्टाचार रोकने के लिये एक प्रमुख संस्था है। भ्रष्टाचार रोकने के लिये संथानम समिति की सिफारिश पर इसका गठन हुआ 

केंद्रीय सतर्कता आयोग को सार्वजनिक हित खुलासे एवं सूचना देने का सुरक्षा प्रस्ताव के तहत सूचना देने वालो द्वारा भ्रष्टाचार एवं कार्यालय के दुरूपयोग के किसी भी प्रकार के खुलासे एवं शिकायते प्राप्त करने एवं उन पर कार्यवाही करने हेतु अभिकरण बनाया गया । इसे व्हिसल ब्लोअर के नाम से भी जाना जाता है ।
इसके अंतर्गत विभागीय जांचो के लिए CID लोक सेवकों के विरुद्ध कार्यवाहियों की मौखिक जांच पड़ताल करते हैं ।
केंद्रीय सतर्कता आयोग, कार्यवाही अपने मुख्यालय नई दिल्ली से संचालित करता है । इसके पास दिवानी न्यायालय की तरह सारी शक्तिया है ।यह आयोग न्यायिक प्रकृति का है । यह केन्द्र सरकार ओऱ उसके प्राधिकरणों से किसी भी प्रकार की रिपोर्ट की जानकारी एवं माँग कर सकता है । ताकि वह उनके सतर्कता एवं भ्रस्टाचार रहित कार्यों पर नजर रख सके ।
यह आयोग अपनी वार्षिक कार्यकलापों की रिपोर्ट राष्ट्रपति को देता है । राष्ट्रपति इस रिपोर्ट को संसद के दोनों सदनों के समक्ष प्रस्तुत करते हैं ।
इसके तहत जो व्यक्ति भ्रस्टाचार से सम्बंधित जानकारी देते हैं, उनकी पहचान को गोपनीय रखा जाता है, एवं उन पर किसी भी प्रकार की कोई लीगल कार्यवाही नहीं की जाती है । इससे सरकारी सेवकों द्वारा विशेषाधिकारो का मनमाना दुरुपयोग होने पर नियंत्रण लगाया जाता है ।

सूचना का अधिकार ( Right to information )

सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के अंतर्गत भारत के प्रत्येक नागरिक को सूचना लेने या जानने का अधिकार देता है, इस अधिकार के द्वारा किसी भी विभाग से कोई सूचना लेने का अधिकार प्राप्त है । सही अर्थों में से एक आम नागरिक ही देश को चलाता है, जब एक आम नागरिक कोई भी वस्तु खरीदता है, तो उसके साथ साथ कर का भी भुगतान करता है, कर के माध्यम से ही सरकार चलती है तो उसे यह जानने का पूरा अधिकार है कि सरकार किस विभाग में कितना पैसा ख़र्च करती है, किस अधिकारी या राजनेता की जेब में कितना पैसा जाता है इन सब प्रश्नों के जवाब सूचना के अधिकार के माध्यम से मांगे जाते हैं । इसके अंतर्गत आप सरकारी निर्णय की प्रति ले सकते हैं, सरकारी दस्तावेजों का निरीक्षण कर सकते हैं , सरकारी कार्यों का निरीक्षण कर सकते हैं ।
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( RIT ) के तहत प्रत्येक सरकारी विभाग में जन / लोक सूचना अधिकार होता है जिसके पास आवेदन जमा करना होता है, जिसके साथ 10 रुपये का आवेदन शुल्क देना पड़ता है, हालांकि विभिन्न राज्यों में अलग अलग शुल्क निर्धारित है । आवेदन के 30 दिनों के अंदर सूचना पाने का प्रावधान है , यदि सूचना अधिकारी सूचना देने मे देरी करता है तो वह अपने देरी के कारण को अभिलिखित करेंगा ओर यदि बिना किसी कारण के सूचना नहीं देता है , या देने से इंकार करता है तो सूचना मांगने वाला नागरिक धारा 19 के तहत अपील दायर कर सकता है । ओऱ यदि पहली अपील से भी संतुष्ट नहीं है, तब द्वितीय अपील भी कर सकता है ।
इस प्रकार RIT के तहत आम नागरिक ओऱ सरकारी विभागों के बीच पारदर्शिता बढ़ गई है ।

पूजा स्थल कानून ( worship act 1991) क्या हे ?

 * कांग्रेस की नरसिम्हा सरकार 1991 में  यह कानून लेकर आई थी |   *मंदिर आन्दोलन के दोर में बढते, मंदिर - मस्जिद  विवादों को रोकने...