विशेष परिस्थितियों के हिसाब से आवश्यक है ओर चूंकि, सत्र नही चलने के कारण दोनों सदनों से पारित भी नहीं किया जा सकता है, तो राष्ट्रपति / राज्यपाल द्वारा नियमो की ऐसी घोषणा को जो समय व परिस्थितियों को देखते हुए अनिश्चित समय के लिये की जाती है। ऐसी घोषणा " अध्यादेश " कहलाती है।
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यही अध्यादेश जब दोनों सदनों के समक्ष रखा जाता है तो ( सत्र शुरू होने के बाद ) संसद के दोनों सदनो / विधानमंडल से पारित हो जाता है । तो यह " अध्यादेश permanent law बन जाता है और यदि सदनो से मंजूरी नही मिलती है तो ऐसा अध्यादेश ( उस temporary time ) के बाद स्वतः ही समाप्त हो जाता है । उसकी कोई विधिक वैल्यू नही होती।
" अर्थात हम यह कह सकते हैं कि समय / परिस्थितियों की मांग के हिसाब से तुरंत प्रभाव से लागू करने के लिये, नियमो की ऐसी घोषणा को अध्यादेश कहते हैं ।
nice artical for me
जवाब देंहटाएंThanks
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