अध्यादेश क्या होता है ?

अध्यादेश जारी करने की शक्ति - राष्ट्रपति ओर राज्यपाल दोनों को होती है। इसे हम यह कह सकते हैं कि, कच्चा क़ानून / अधूरा कानून। अर्थात जब कोई कानून- नियम अधिनियम बनाया जाता है तो, संसद के दोनों सदनो से पारित होने के बाद या राज्य का कोई कानून है तो विधानमंडल से पारित होने के बाद ही पूर्ण रूप से लागू होता है लेकिन अध्यादेश उस परिस्थिति में जारी किया जाता है जब राज्य या देश में परिस्थिति ऐसी है कि तुरंत ही किसी कानून /विधि / नियम की आवश्यकता है, तथा जब सत्र नही चल रहा है, तब राष्ट्रपति / राज्यपाल किसी आपात स्थिति में, व्यवस्था को संभालने के लिये तुरंत प्रभाव से ऐसे नियमो / कानूनों की घोषणा करते हैं,


 विशेष परिस्थितियों के हिसाब से आवश्यक है ओर चूंकि, सत्र नही चलने के कारण दोनों सदनों से पारित भी नहीं किया जा सकता है, तो राष्ट्रपति / राज्यपाल द्वारा नियमो की ऐसी घोषणा को जो समय व परिस्थितियों को देखते हुए अनिश्चित समय के लिये की जाती है। ऐसी घोषणा " अध्यादेश " कहलाती है।

       यही अध्यादेश  जब दोनों सदनों के समक्ष रखा जाता है तो ( सत्र शुरू होने के बाद ) संसद के दोनों सदनो / विधानमंडल से पारित हो जाता है । तो यह " अध्यादेश permanent law बन जाता है और यदि सदनो से मंजूरी नही मिलती है तो ऐसा अध्यादेश ( उस temporary time )  के बाद स्वतः ही समाप्त हो जाता है । उसकी कोई विधिक वैल्यू नही होती।
" अर्थात हम यह कह सकते हैं कि समय / परिस्थितियों की मांग के हिसाब से तुरंत प्रभाव से लागू करने के लिये, नियमो की ऐसी घोषणा को अध्यादेश कहते हैं ।

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