मेरे द्वारा लिखे जा रहे ब्लॉग्स मे इंडियन लॉ एवम भारतीय सविंधान से संबंधित legal content , व विधिक जानकारी,उपबंध,सुचना,प्रावधान, एवम ऐसी शब्दावली को भी परिभाषित किया गया है जो कि जन सामान्य के लिए कठिन है तथा जो प्रथम दृष्टया देखने या पढ़ने से साधारणतः समझ मे नही आते हैं अतः मेरे द्वारा ऐसी जानकारी एवम विधिक शब्दावली को इस प्लेटफॉर्म के माध्यम से आसान शब्दों मे समझाने का प्रयास किया गया ।
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संसद मे प्रश्नकाल और शून्यकाल क्या होता है । ओर यह कब शुरू होता है व प्रश्न कितने प्रकार के होते है।
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जनहित याचिका का अर्थ
भारत में जनहित याचिका या P I L की उत्पत्ति न्यायिक सक्रियता का ही एक रूप है। न्यायमूर्ती पी.एन. भगवती ने इस अवधारणा को सार्थक रूप प्रदान किया
न्यायिक सक्रियता का अर्थ
भारत मे न्यायिक सक्रियता का सिद्धांत 1970 के दशक के मध्य में आया। न्यायिक सक्रियता की नींव न्यायमूर्ति वी.आर. कृष्ण अय्यर, पी.एन. भगवती, ओ.चिन्नप्पा रेडडी तथा डी. ए. देसाई ने रखी।
इसका अर्थ है , नागरिको के अधिकारों व समाज मे न्याय को बढ़ावा देने के उद्देश्य से न्यायपालिका खुद आगे बढ़कर सक्रिय होकर कार्य करती है, न्यायपालिका स्वंय एक्टिव होकर समाजहित में , जन कल्याण में कार्य करती है ।
" न्यायिक सक्रियता को न्यायिक गतिशीलता " भी कहते है
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गणतंत्र का अर्थ
एक लोकतांत्रिक राज्य व्यवस्था को दो वर्गों में बाटा जा सकता है--राजशाही और गणतंत्र ! राजशाही व्यवस्था में राज्य का प्रमुख (आमतौर पर राजा या रानी ) उत्तराधिकारीता के माध्यम से पद पर आसीन होता है, जैसे कि ब्रिटेन में। वही गणतंत्र में राज्य प्रमुख हमेशा प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रुप से एक निश्चित समय के लिए चुनकर आता है , जैसे अमेरिका ।
इसलिए भारतीय सविंधान की प्रस्तावना में गणतंत्र का अर्थ यह है कि भारत का प्रमुख अर्थात राष्ट्रपति चुनाव के जरिये सत्ता में आता है । उसका चुनाव पांच वर्ष के लिए अप्रत्यक्ष रूप से किया जाता है ।
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गणतंत्र के अर्थ में दो ओर बाते शामिल है ।पहली यह कि राजनेतिक सम्प्रुभता किसी एक व्यक्ति जैसे राजा के हाथ मे होने की बजाये लोगो के हाथ मे होती है , और दूसरी , किसी भी विशेषाधिकार प्राप्त वर्ग की अनुपस्थिति । इसलिए हर सार्वजनिक कार्यालय बगेर किसी भेदभाव के प्रत्येक नागरिक के लिए खुला होगा ।
पूजा स्थल कानून ( worship act 1991) क्या हे ?
* कांग्रेस की नरसिम्हा सरकार 1991 में यह कानून लेकर आई थी | *मंदिर आन्दोलन के दोर में बढते, मंदिर - मस्जिद विवादों को रोकने...
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